Kabir Das Ke Dohe With Meaning in Hindi

By | August 26, 2017

Best Kabir Das Ke Dohe With Meaning in Hindi – Saint Kabir is one of the best in Hindi Literature. You can check it out awesome Kabir Das Ke Dohe With Meaning in Hindi. कबीर दास अपने दोहों के माध्यम से बड़ी सरलता से समझा देते थे. All awesome collection of Dohe check it out here.

|| For More Hindi Quotes – APJ Abdul Kalam Quotes in Hindi ||

Latest Kabir Das ke Dohe in Hindi with Meaning

  • Tinka kabahu na nindiye, paav tale jo hoyeKabahu udd aankho pade, peed gehri hoyeतिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँव तले होय ।
    कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीड गहरी होय ॥One should not abuse a blade of grass under one’s feet. If that happens to strike on one’s eye then there will be terrific pain.
  • साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय ।
    मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय ॥अर्थ : कबीर दस जी कहते हैं कि परमात्मा तुम मुझे इतना दो कि जिसमे बस मेरा गुजरा चल जाये , मैं खुद भी अपना पेट पाल सकूँ और आने वाले मेहमानो को भी भोजन करा सकूँ।
  • लूट सके तो लूट ले,राम नाम की लूट ।
    पाछे फिर पछ्ताओगे,प्राण जाहि जब छूट ॥अर्थ : कबीर दस जी कहते हैं कि अभी राम नाम की लूट मची है , अभी तुम भगवान् का जितना नाम लेना चाहो ले लो नहीं तो समय निकल जाने पर, अर्थात मर जाने के बाद पछताओगे कि मैंने तब राम भगवान् की पूजा क्यों नहीं की ।
  • दोहा:- कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार
    साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।अर्थ:- बुरे वचन विष के समान होते है और अच्छे वचन अमृत के समान लगते है
  • माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख ।
    माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख ॥अर्थ : माँगना मरने के बराबर है ,इसलिए किसी से भीख मत मांगो . सतगुरु कहते हैं कि मांगने से मर जाना बेहतर है , अर्थात पुरुषार्थ से स्वयं चीजों को प्राप्त करो , उसे किसी से मांगो मत।
  • धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
    माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।अर्थ : मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है. अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु  आने पर ही लगेगा !
  • दोहा   – या दुनिया दो रोज की, मत कर यासो हेत | गुरु चरनन चित लाइये, जो पुराण सुख हेत ||
    अर्थ   – इस संसार का झमेला दो दिन का है अतः इससे मोह सम्बन्ध न जोड़ो | सद्गुरु के चरणों में मन लगाओ, जो पूर्ण सुखज देने वाले हैं |
  • Mana unmana na toliye, shabd ke mol na tolMurakh log na jansi, aapa khoya bolमन उन्मना न तोलिये, शब्द के मोल न तोल |मुर्ख लोग न जान्सी, आपा खोया बोल ||When your mind is raged then you should not react to the words. One does not have any means for the valuation and weight of words. The fools do not understand this and lose their balance while talking
  • Naari purush sab hi suno, yeh satguru ki saakhVish phal phale anek hai, mat dekho koi chaakhनारी पुरुष सब ही सुनो, यह सतगुरु की साख |विष फल फले अनेक है, मत देखो कोई चाख ||Listen everybody to the preaching of a good preacher. There are many ways of sensual enjoyment. But one should abstain from any such way
  • दोहा   – कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ जो कुल को हेत | साधुपनो जाने नहीं, नाम बाप को लेत ||
    अर्थ   – गुरु कबीर साधुओं से कहते हैं कि वहाँ पर मत जाओ, जहाँ पर पूर्व के कुल-कुटुम्ब का सम्बन्ध हो | क्योंकि वे लोग आपकी साधुता के महत्व को नहीं जानेंगे, केवल शारीरिक पिता का नाम लेंगे ‘अमुक का लड़का आया है’.
  • दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
    अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।अर्थ : यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह  दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत.
  • निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
    बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।अर्थ : जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.
  • Parnaari ki rachnao, jo lehasun ki khaniKhoone besir khaiy, pragat hoye deewaniपरनारी का राचणौ, जिसकी लहसण की खानि ।
    खूणैं बेसिर खाइय, परगट होइ दिवानि ॥A desire for other’s wife is like a mine of garlic. A person can eat garlic hiding from all. But the fact of his having consumed garlic is clear to anyone who meets himपरनारी का साथ लहसुन खाने के जैसा है, भले ही कोई किसी कोने में छिपकर खाये, वह अपनी बास से प्रकट हो जाता है ।

    भगति बिगाड़ी कामियाँ, इन्द्री केरै स्वादि ।

  • दोहा   – इष्ट मिले अरु मन मिले, मिले सकल रस रीति | कहैं कबीर तहँ जाइये, यह सन्तन की प्रीति ||
    अर्थ   – उपास्य, उपासना-पध्दति, सम्पूर्ण रीति-रिवाज और मन जहाँ पर मिले, वहीँ पर जाना सन्तों को प्रियकर होना चाहिए |
  • दोहा:- साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं
    धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं।अर्थ:- कबीर दास जी कहते कि साधू हमेशा करुणा और प्रेम का भूखा होता और कभी भी धन का भूखा नहीं होता| और जो धन का भूखा होता है वह साधू नहीं हो सकता|
  • हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
    आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मुए, मरम न कोउ जाना।अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।
  • दोहा    – गारी ही से उपजै, कलह कष्ट औ मीच | हारि चले सो सन्त है, लागि मरै सो नीच ||
    अर्थ    – गाली से झगड़ा सन्ताप एवं मरने मारने तक की बात आ जाती है | इससे अपनी हार मानकर जो विरक्त हो चलता है, वह सन्त है, और (गाली गलौच एवं झगड़े में) जो व्यक्ति मरता है, वह नीच है
  • दोहा   – मन राजा नायक भया, टाँडा लादा जाय | है है है है है रही, पूँजी गयी बिलाय ||
    अर्थ   – मन-राजा बड़ा भारी व्यापारी बना और विषयों का टांडा (बहुत सौदा) जाकर लाद लिया | भोगों-एश्वर्यों में लाभ है-लोग कह रहे हैं, परन्तु इसमें पड़कर मानवता की पूँजी भी विनष्ट हो जाती है.
  • दोहा – जीवत कोय समुझै नहीं, मुवा न कह संदेश | तन – मन से परिचय नहीं, ताको क्या उपदेश |
    अर्थ – शरीर रहते हुए तो कोई यथार्थ ज्ञान की बात समझता नहीं, और मार जाने पर इन्हे कौन उपदेश करने जायगा | जिसे अपने तन मन की की ही सुधि – बूधी नहीं हैं, उसको क्या उपदेश किया?

Above is awesome collection of Kabir Das Ke Dohe With Meaning in Hindi, For more Hindi Dohe you can search it out here.

 

Get Free Email Updates!

Signup now and receive an email once I publish new content.

I will never give away, trade or sell your email address. You can unsubscribe at any time.